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  Kaila Devi Temple Karauli मन्दिर में दर्शन का समय मन्दिर प्रातः 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक दर्शन के लिये खुला रहता है ।  दिन में 11 बजे शयन हेतु पट बन्द होते हैं जो मध्यान्ह बाद खुल जाते हैं। यह मन्दिर राजस्थान राज्य के करौली जिले में स्थित है। मन्दिर में दो प्रतिमाये हैं। कैला देवी की प्रतिमा का चेहरा तिरछा है। इस मन्दिर को उत्तर भारत में शक्ति पीठ माना जाता है। माना जाता है कि मन्दिर का निर्माण 1600 ईस्वी में राजा भोमपाल सिंह द्वारा करवाया गया था। माना जाता है कि भगवान कृष्ण की बहन योगमाया जिसका वध कंस करना चाहता था, वे ही कैला देवी हैं। एक मान्यता यह भी है कि प्राचीन काल में नरकासुर नामक एक राक्षस का क्षेत्र में आंतक था। यहां के निवासियों द्वारा माता दुर्गा की पूजा की गई और माता दुर्गा ने कैला देवी का अवतार लेकर नरकासुर राक्षस का वध कर नरकासुर का आंतक समाप्त किया। इस कारण इन्हें दुर्गा का अवतार भी माना जाता है। मंदिर के निर्माण में करौली के लाल पत्थर का इस्तेमाल किया गया है, और यह मध्यकालीन स्थापत्य कला का अनुपम उदारहण है। कैला देवी का लक्खी मेला देश भर में विख्यात है। नवरा...
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  Bandhe Ke Balaji Temple Ajmer Road, Jaipur बन्धे के बालाजी मंदिर,  अजमेर रोड, जयपुर जयपुर के नजदीक अजमेर रोड पर महलां के पास बन्धे के बालाजी का विशाल मंदिर है, जो बोराज नामक गांव के नजदीक है। हनुमान जी का यह मंदिर आस्था का केन्द्र है और प्राकृतिक रूप से भी रमणीय वातावरण की अनुभूति कराता है। मंदिर के इतिहास के विषय में मंदिर के पुजारी महेश कुमार शर्मा ने बताया कि काफी पहले यह स्थान पूरी तरह जंगल हुआ करता था। एक दिन यहां एक बनजारा आया, जो अपने साथ एक मूर्ति भी लाया। उसने इस स्थान पर रात्रि विश्राम किया। अगले दिन जब वह अपने सफर पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हुआ, तो यह मूर्ति अपने स्थान से नहीं हिली। उसने भरसक प्रयत्न किए, लेकिन वह इसे नहीं हिला सका। वह मूर्ति को वहीं छोड़ अपने घर चला गया। वहां उसने देखा कि उसकी अंधी मां की नेत्र ज्योति लौट आई। वह समझ गया था कि यह उस मूर्ति का चमत्कार है। वह लौटा और उसने वर्तमान मंदिर के स्थान पर उस मूर्ति को स्थापित करवाया। यह मंदिर स्थानीय लोगों के साथ ही दूर—दूर के श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बना है। पहाड़ी और बंधे (छोटा तालाब) के नजदीक होने ...
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SHAKTIPEET MATA JAWALA MATA, JOBNER   राजस्थान के इस शक्तिपीठ पर माता के घुटने की होती है पूजा जयपुर। शहर के निकट जोबनेर में पहाड़ी पर धार्मिक आस्था और शक्तिपीठ स्थल के रूप में मशहूर ज्वाला माता के यहां शारदीय नवरात्र में लक्खी मेला लगता है। यह मेला 15 दिन तक निरन्तर चलता है। यहां साल में दो मेलों का आयोजन होता है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शनों को आते हैं। पौराणिक मान्यता है कि यहां माता के घुटने की पूजा की जाती है। मंदिर के पुजारी बनवारी ने बताया कि मंदिर के नीचे लांगुरिया बलवीर ऊंचे चबूतरे पर विराजमान हैं। लांगुरिया को भैरव भी कहा जाता है, जो माता के रक्षक माने जाते हैं। ठिकाने से मेले के लिए भक्तों को परवाना भेजा जाता है, जिसे राव जाति के लोग भक्तों तक लेकर पहुंचते हैं। मेले में पहुंचे वाले अलग-अलग पंथ के लोगों का पूर्व राजपरिवार की ओर से पाग, शिरोपाव व नारियल देकर सम्मान किया जाता है। मान्यता है कि निसंतान दंपति संतान की कामना लिए माता के मुख्य द्बार पर मेहंदी से हाथ का छापा और उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। रोगों से मुक्ति के लिए महिलाएं माता के यहां शरीर का...
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Khatu Shyam Mandir  [SIKAR- RAJASTHAN-INDIA]                                                राजस्थान के सीकर स्थित खाटू श्याम जी का मंदिर भारत देश में कृष्ण भगवान के मंदिरों में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। खाटू श्याम जी को कलयुग का सबसे मशहूर भगवान माना जाता है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू गांव में बने खाटू श्याम जी के मंदिर की हिंदू भक्तों में बहुत मान्यता है। भक्तों का कहना है कि श्याम बाबा से जो भी मांगों, वो लाखों-करोड़ों बार देते हैं, यही वजह है कि खाटू श्याम जी को लखदातार के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म के मुताबिक खाटू शम जी को कलयुग में कृष्ण का अवतार माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि खाटू श्याम जी कलयुग में उनके नाम श्याम के नाम से पूजे जाएंगे। यही वजह है कि आज खाटू श्यामजी देश में करोड़ों भक्तों द्वारा पूजे जाते हैं। यहां सालभर बाबा श्याम के प्रति आस्था रखने वाले 40 लाख भक्त हर साल उनके दर्शन के लिए पहुंचते हैं। खासतौर से...